स्थानीय खरीदारी करें, देश के उद्योग को ‘ब्रांडेड’ बनाएं
नई दिल्ली, अक्टूबर 2025 — देश में त्योहारी सीज़न के साथ ही एक नई सोच फिर उभर रही है — “स्थानीय खरीदारी करें, देश के उद्योग को ब्रांडेड बनाएं।” यह संदेश अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता एक ठोस कदम बन गया है।
स्थानीय से वैश्विक तक
भारत के हज़ारों छोटे उद्योग, हस्तशिल्पी और कुटीर उद्यम अब अपनी पहचान को ‘ब्रांड’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पहले जो सामान “स्थानीय बाजार” तक सीमित था, वह अब ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स और राष्ट्रीय प्रदर्शनियों के माध्यम से देश-विदेश के उपभोक्ताओं तक पहुँच रहा है।
“अगर हम अपने घर, त्योहार या रोज़मर्रा की ज़रूरतों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, तो वही छोटे उद्योग एक दिन बड़े ब्रांड बन सकते हैं,” — कहते हैं अभिषेक शर्मा, एक लघु उद्योग सलाहकार।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय (MSME) ने हाल ही में ‘लोकल टू ग्लोबल मिशन 2025’ की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में पहचान दिलाना है।
इसके तहत:
हर राज्य में “ब्रांड भारत बाजार” स्थापित किए जा रहे हैं।
छोटे उद्योगों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्रमोट करने के लिए ई-कॉमर्स पोर्टल्स के साथ साझेदारी की जा रही है।
- भारत के युवा उद्यमी भी इस सोच को नया आयाम दे रहे हैं। हैंडमेड फैशन, ऑर्गैनिक फूड, और सस्टेनेबल होम डेकोर जैसे क्षेत्रों में कई स्थानीय ब्रांड अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहे हैं।
जैसे — जयपुर का “कला ग्राम”, वाराणसी का “रंग भारत” और कोयंबटूर का “ग्रीन नेचर टेक्स” अब भारत के गर्वित ‘लोकल ब्रांड्स’ बन चुके हैं। “स्थानीय
खरीदारी” केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं — यह देश की आर्थिक ताकत को नए आयाम देने का माध्यम है।
हर खरीदार के हाथ में यह शक्ति है कि वह किसी कारीगर, किसान या उद्यमी के सपने को साकार करे।विशेषज्ञों का मानना है कि “वोकल फॉर लोकल” तभी सफल होगा जब उपभोक्ता स्वयं भारतीय ब्रांडों पर भरोसा दिखाएँ।
“हर बार जब हम विदेशी लेबल की जगह भारतीय ब्रांड चुनते हैं, हम अपने देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं
YE DIWALI APNO K SATH WALI
